यूँ ही ...
तुम समन्दर का किनारा हो मैं एक प्यासी लहर की तरह तुम्हे चूमने के लिए उठता हूँ तुम तो चट्टान की तरह वैसी ही खड़ी रहती हो मैं ही हर बार तुम्हे बस छू के लौट जाता हूँ
- अनूप भार्गव
Anoop Bhargava email: anoop_bhargava@yahoo.com