नृत्य
धूसर रेत के टीले पर चाँदनी आई उतर साठ कली का घाघरा अँगिया एक कली भर पीले, लाल सुर्ख रंगों से रंगी थी उसकी चूनर वाणी सुरीली कमर लचीली पाँव उठे जो इस गोरी के कैसे झूमी रेत नचीली।
- दिव्या माथुर
Divya Mathur email: divyamathur at aol dot com