कर्म
कर्म दैविक सम्पदा का द्वार है; विश्व के उत्कर्ष का आधार है। कर्म पूजा, साधना का धाम है; कर्मयोगी को कहाँ विश्राम है। कर्म भावी योजना का न्यास है; सत्य-चित-आनन्द का अभ्यास है। कर्म जीवन का मधुरतम काव्य है; कर्म से ही मुक्ति भी सम्भाव्य है।
- किरीटचन्द्र जोशी
Ref: Navneet Hindi Digest, May 1999 Poet's Address: B 12 Shivam Complex Lanka, Varanasi 221005