चिट्ठी सी शाम
एक और चिट्ठी सी शाम डूब गयी सूरज के नाम। जाड़े की धूप और कुहरे की भाषा कोने में टँगी हुई गहरी अभिलाषा आसमान के हाथों चाँदी का गुच्छा ताल में खिली जैसे फिर कोई इच्छा छत से ऊपर उठते धुएँ के कलाम
- सुरेन्द्र काले
Poet's Address: Nawab Cottage, Purdilpur, Gorakhpur Ref: Naye Purane, September,1998 Hospital Colony Mohangunj, Tiloi Raibareili (U.P.) - 229 309