इस महीने
क्योंकि ~ धर्मवीर भारती
... क्योंकि सपना है अभी भी -
इसलिए तलवार टूटे, अश्व घायल
कोहरे डूबी दिशायें,
कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धुंध-धूमिल,
किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी
... क्योंकि है सपना अभी भी!
...
सुर्खियाँ ~ मंजरी गुप्ता पुरवार
ढूँढती हैं निगाहेँ
सुर्खियाँ
जीत की
हार की
उन्नत व्यापार की
...
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प्रकाशन का समयक्रम:
सामान्यतः महीने का प्रथम और तीसरा शुक्रवार